आईपीएल का प्रभाव
साल के मैचों की वृद्धि
- टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट का आरंभ 17 फरवरी 2005 को हुआ था।
- 2017 में टीमों की संख्या में 5 गुना वृद्धि हुई।
- साल के मैचों का औसत 280 तक पहुंचा।
स्कोरिंग रेट का उन्नति
- 2007 में पहली बार 300+ स्कोर बनाया गया था।
- 2010 में 400+ स्कोर भी हुआ था।
- हर तीसरे मैच में 300+ रन बन रहे हैं।
डबल सेंचुरी की बढ़त
- टी-20 में 12 साल में 19 सेंचुरी लगी, पिछले 7 साल में 124।
- रोहित शर्मा के 5 शतक और ग्लेन मैक्सवेल के 5 शतक।
गेंदबाजों का इम्पैक्ट
- गेंदबाजों की औसत विकेट की आंकड़ा 7 तक पहुंच गया है।
पार्ट-2: वनडे फॉर्मेट पर आईपीएल का प्रभाव
मैचों की वृद्धि
- 2006 में सालाना मैचों की संख्या 257% तक बढ़ी।
स्कोरिंग रेट का उन्नति
- 2007 में 300+ स्कोर की पहली बारिश हुई।
- 2007 के बाद हर तीसरे मैच में 300+ रन बनते हैं।
टेस्ट क्रिकेट के शुरूआती दशकों में 1844 में कनाडा और अमेरिका के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला गया था। इसके बाद, 1877 में टेस्ट क्रिकेट का आरंभ हुआ, जब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया। 1990 तक, 7 देशों ने टेस्ट क्रिकेट खेला, जो कि 2007 तक 11 देशों तक बढ़ गया।
IPL से पहले, एक टीम औसतन 17 साल में 63 मैच खेलती थी और साल में टेस्ट क्रिकेट की शुरुआती दशकों में, जबकि 37 साल के दौरान, 31 बार 350 से अधिक की स्कोर बनाई गई थी। पिछले 17 सालों में इस आंकड़ा में 4.6 गुना बढ़ोत्तरी हुई है, और 145 बार 350 से अधिक का स्कोर बनाया गया है। इसका कारण है IPL की शुरुआत।
IPL के आने के बाद, वनडे क्रिकेट में पहली डबल सेंचुरी लगी, जिसकी अब 12 से ज्यादा गिनती हो चुकी है। टी-20 टीमें 16 से बढ़कर 103 हो गईं हैं। टेस्ट क्रिकेट फॉर्मेट भी रोचक हो गया है, क्योंकि अब 80% मुकाबलों का नतीजा आता है।
IPL 2024 सीरीज के पार्ट-3 में, हम वनडे, टेस्ट और टी-20 फॉर्मेट पर IPL का प्रभाव देखेंगे। इसे 4 भागों में विभाजित किया जाएगा, पहला भाग मैचों की संख्या, दूसरा भाग स्कोरिंग रेट, तीसरा भाग बैटर्स और चौथा भाग बॉलर्स पर इम्पैक्ट।
1. टी-20 फॉर्मेट पर IPL का प्रभाव
17 फरवरी 2005 को टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरुआत हुई, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने पहला मैच खेला। 2 साल बाद विश्व कप खेला गया, जिसे महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने जीता।
2010 तक 6 साल में टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले देश 17 थे। औसतन 33 मैच होते थे, और 6 साल में औसतन 12 ही मैच खेलती थीं। अगले 6 साल में सालाना औसतन मैच बढ़कर 63 हुए और टीमों की संख्या 21 हो गई।
लेकिन असली बदलाव 2017 से हुआ। तब से टी-20 खेलने वाली टीमें 5 गुना बढ़कर 103 हो चुकी हैं, और सालाना मैचों का औसत आंकड़ा 280 तक पहुंच गया है।
नेपाल, मंगोलिया, जर्सी जैसे छोटे देशों ने टी-20 फॉर्मेट में क्रिकेट खेलना शुरू किया है। क्रिकेट ग्लोबल स्पोर्ट बन रहा है, और 2028 के ओलंपिक्स में भी शामिल हो गया है। 2024 का टी-20 विश्व कप भी वेस्टइंडीज और अमेरिका में होगा।
भाग-2: 200+ रन के टारगेट आसानी से चेज हुए
IPL ने टी-20 क्रिकेट की स्कोरिंग रेट बढ़ाई। 2010 तक 19 बार 200 प्लस का स्कोर बना,लगभग 41 टेस्ट होते थे। IPL के बाद, 17 साल में एक टीम की संख्या तो बढ़ी, लेकिन औसतन मैच 57 हो गए। टीमों की संख्या बढ़ी